झारखंड के विभिन्न क्षेत्रों में धूमधाम से मनाया गया चंडक पूजा

VijaySharma
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तोपचांची -- चड़क पुजा का परंपरा सदियों से चला आ है।पूर्वजों द्वारा यह पर्व सदियों से मनाया जाता है। यह पर्व चैत मास में मनाया जाता है। चैत मास के 15वें दिन से यहां के आस पास के गांव वाले सभी लोग निरामिष भोजन लेना शुरू कर देते हैं।चड़क पुजा चैत मास के अन्तिम दिन में मनाया जाता है।गांव वाले पुरुष लोग भक्त जन के रूप में हिस्सा लेते हैं। भक्त जन पहला दिन शारीरिक शुद्धि कारण करवाते हैं।ओर फिर उपवास रखना शुरू कर देते हैं। पहला दिन शाम में राजा बांध तालाब में सभी भक्त जन स्नान करते हैं और सभी प्रकार के फल चढ़ाएं जातें हैं। दुसरे दिन में सभी भक्त जन सारा दिन ओर रात भर उपवास रखते हैं।रात में शिव एवं पार्वती मंदिर में पूजा अर्चना करते हैं और मंदिर के चारों ओर परिक्रमा करते हैं। तीसरे दिन सुबह हल्दी और तेल का लेपन सभी भक्त जन पुरे शरीर में करते हैं और फिर नदी, तालाब में स्नान करने के बाद सभी भक्त जन मंदिर में पूजा अर्चना करते हैं। उसके बाद शिव एवं पार्वती जी के मंदिर के बगल में बाबा दुबे जी का पुजा अर्चना करते हैं। ओर फिर बकरे का बलि दिया जाता है।
चड़क पूजा तोपचांची शिव मंदिर प्रांगण एक दिवशीय चडक पूजा का मनाया गया। इस अवसर पर 35 फुट ऊंचे खंभे  पर शिव भक्त शरीर में कुल चुभोकर शिव के भक्ति में लीन रहे और  भोक्ता मेला का  आयोजन किया गया मंदिर प्रांगण में  करीब 50 भोक्ताओं ने शरीर पीठ पैर छाती आदि जगहों पर नुकीला कील चुभोकर ऊंचे खंभे पर लटकर परिक्रमा किए पारंपरिक ठोल ढाका शहनाई में  शिव भक्ति में लीन होकर भोक्तायो ने मंदिर प्रांगण में निरितीय में लीन रहे इस अवसर पर ग्रामीणों ने  बेहद उत्साह  के साथ  भोक्ता मेला में भाग लिए l
संवाददाता गोपाल भारती

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