निरसा मे सिझानु पर्व बहुत ही धूमधाम से मनाया गया

VijaySharma
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निरसा के खुसरी पंचायत के मुखिया एवं समाजसेवी सपन गोराई जी के आवास पर भी सिझानु पर्व मनाया गया उनके आवास पर  मुख्य रूप से निरसा उत्तर पंचायत के मुखिया श्री दिनेश जी, भमाल पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि जोगिंदर यादव जी, निरसा मध्य पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि एवं समाजसेवी  श्री मनोज सिंह जी गुरुदास चटर्जी फाउंडेशन के कोषाध्यक्ष कृष्णा रजक जी , मीडिया प्रभारी प्रभु सिंह जी, बंटी सिंह एवं पंचायत के  लोग  उपस्थित हुए एवं व्यंजन का आनंद उठाएं
 इस विषय में मुखिया श्री सपन गौराई जी  से पूछा गया कि यह पर्व क्यों मनाया जाता है तो उसने बताएं कि बसंत पंचमी बीत गई और आज शीतल षष्ठी है।अपने बच्चे की भलाई के लिए एक माँ की व्रत।आज बंगली के घर में खाना पकाया नहीं जाता है।विभिन्न प्रकार सब्जी, मछली,चावल और दाल को एक दिन पहले पकाकर खाने का नियम है।  चुल्हा के अलावा शिल जोनोरा के लिए भी आज आराम का दिन है।  शीतल षष्ठी गर्म भोजन नहीं है बल्कि एक दिन पहले पका हुआ ठंडा भोजन खाने का नियम है।  इसके पीछे वैज्ञानिक कारण यह है कि इस दौरान चूंकि वसंत ऋतु या चेचक का मौसम होता है, इसलिए बासी खाने से पूरा शरीर ठंडा रहता है।  मेडिकल भाषा में इसे आरामदायक भोजन कहा जाता है।  चूँकि यह छठा दिन होता है, इस दिन 6 प्रकार की मौसमी सब्जियों को एक साथ उबालकर पूरा खाया जाता है, इसलिए इसे गोटा सिद्ध कहा जाता है।  मूल रूप से आलू,बीन्स, सेम, बैंगन, पालक,कलाई,मूंग और अन्य प्रकार की दालों के साथ उबाला जाता है।  हजारो सालों से चली आ रही इस परंपरा को मानभूम में सिजान या बासी भात उत्सव कहा जाता है।

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