मनुष्य को हमेशा भगवान का बनकर रहना चाहिए.., हरिदास जी महाराज

VijaySharma
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झरिया (धनबाद)ः. ओसीपी में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के सप्तम दिवस की शुरुआत विश्व शांति के लिए प्रार्थना के साथ की गई। जिसके बाद पूज्य महाराज सुरेंद्र हरिदास जी ने भक्तों को "जय जय श्यामा जय जय श्याम जय जय श्री वृंदावन धाम " भजन का श्रवण कराया। 
कथा प्रसंग में उन्होंने बताया कि
ताम्बे का पात्र भगवान को बहुत प्रिय है इसलिए भगवान की पूजा में ताम्बे के पात्र का इस्तेमाल करना चाहिए जिससे भगवान ज्यादा प्रसन्न होते हैं।
 शालिग्राम, तुलसी और शंख जिस घर में होते हैं भगवान उस घर में वाश करते हैं यह तीनों भगवान को बहुत प्रिय होते हैं। 
जब घर में शंख होता है तो उस शंख में जल या तुलसी अवश्य रहना चाहिए।  शंख और तुलसी को अलग करना वाला सात जन्मों तक रोगी होता है मात्र तुलसी जल चढ़ाने से मनुष्य भगवान के धाम जाते हैं। 

कभी भी मनुष्य को अपने घर में रखे शालिग्राम, तुलसी और शंक को अलग-अलग नहीं रखा चाहिए जो मनुष्य ऐसा करता है वह व्यक्ति पाप का हक़दार होता है। 

मनुष्य कथा अपने कल्याण के लिए सुनता है। जिस मनुष्य ने इस लोक में भागवत कथा का श्रवण कर लिया उस मनुष्य का कल्याण हो जाता है और जो मनुष्य कथा का श्रवण नहीं करता वह व्यक्ति नर्क का भोगी होता है।  

इस संसार में ऐसे मनुष्य होते है जो सिर्फ प्रेम करने वालों को प्रेम करते है लेकिन कुछ ऐसे भी मनुष्य होते हैं जो प्रेम ना करने वालों से भी प्रेम करते हैं। जो प्रेम करने वालों को प्रेम करते है वह सिर्फ और सिर्फ व्यापार होता है और जो सब को प्रेम करता वही धर्म होता है। 

भगवान कहते हैं मैं मनुष्य को मिलकर छिप जाता हूँ क्योंकि जब भगवान मनुष्य को मिलते हैं तो वह मालामाल हो जाते हैं और जब छिप जाते हैं तो फिर से मनुष्य अपना सब कुछ हार देता है।इस कथा को सफल बनाने में प्रमुख यजमान परिवार अमर निषाद रितु देवी ,विजय निषाद कमला देवी, प्रदीप कुमार अग्रवाल,गंगा देवी, सरस्वती देवी,रितेश शर्मा, राजवंती देवी,विश्व मोहन कुमार, सरजू यादव,उषा पासवान,ठाकुर बाबा, महावीर राणा, जगरनाथ महतो, चिन्ता देवी,सुरज यादव, सुरजीत कु० सिदार, ममता कुमारी,जीवन कुमार, झरना महतो,सिपाही सिंह,,भोला साहनी, आलोक राज ,,सौरव पासवान , मथुरा मल्लाह, मुन्नी देवी  , ,गुड़िया देवी, आदि समस्त नगरवासियों के सहयोग से किया जा रहा है।

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