कथा सुनने से मनुष्य का कल्याण होता है...मनुष्य को शास्त्रों के अनुसार कर्म करने पर ही फल मिलेगा...

VijaySharma
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धनबाद  पूज्य श्री सुरेन्द्र हरिदास जी महाराज के पावन सानिध्य में स्थान -टेलिफोन एक्सचेंज रोड बैंकमोड धनबाद, में 16 से 24 जनवरी 2024  तक मॉर्निंग वॉक योगा ग्रुप के सहयोग से श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। 

श्रीमद् भागवत कथा के चतुर्थ दिवस की शुरुआत विश्व शांति के लिए प्रार्थना के साथ की गई। जिसके बाद पूज्य महाराज जी ने है प्रभू मुझे बता दो चरणों में कैसे आऊं " भजन का श्रवण कराया। 

जो सब जगह माथा टेकते हैं उन पर स्वयं देवता भी विश्वाश नहीं करते हैं और जिनकी एक भगवान में सच्ची निष्ठा होती हैं तो वह आराध्य ही उस भक्त का बेडा पार कर देते हैं। 

शास्त्रों में बताया गया है कि जो व्यक्ति तपस्या करने वालों को रोकता है  उसे मृत्यु दंड की प्राप्ति होती है। 

जिस देश का राजा धर्मात्मा होता है तो उस देश की प्रजा भी धर्मात्मा होती है इसलिए राजा को धर्मात्मा ही होना चाहिए ताकि उसकी प्रजा किसी गलत मार्ग पर न चले और कोई अधर्म का काम ना करे। 

मनुष्य को क्रोध को भुलाकर अपने कर्तव्य का पालन करना चाहिए। कर्तव्य ही मनुष्य का कर्म होता है। जब मनुष्य कथा सुनने आते हैं तो पाप उस मनुष्य को छोड़ कर चले जाते हैं क्योंकि कथा सुनने से पाप नष्ट होते हैं। 

कर्मों का फल देने वाले भगवान होते हैं क्योंकि लोक, परलोक में कोई भी व्यक्ति भगवान से तेज़ नहीं होता है। एक से बड़े एक मनुष्य अपने सद्मार्ग पार चलकर ही श्रेष्ट हुए हैं।  जो अच्छे कर्म करते है वह मनुष्य श्रेष्ट होते हैं। 

जो मनुष्य इस संसार में आएं हैं उस मनुष्य की एक न एक दिन मृत्यु होनी होती है और उसी मनुष्य को सुख की प्राप्ति होती है जो धर्म के पथ पर चलता है और जो व्यक्ति अधर्म के पथ पर चलता है उसे कभी भी सुख की प्राप्ति नहीं होती है।  मृत्यु जीवन का सब से बड़ा सत्य है। 

अधर्म पर चलने वाले लोगों को कोई आशीर्वाद नहीं देता है। जो सच्चाई और धर्म के रास्ते पर चलते हैं उनके लिए सदा आशीर्वाद निकलता है। मनुष्य को शास्त्रों के अनुसार कर्म करने पर ही फल मिलेगा। 

मनुष्य की बुद्धि कर्म में फसी होती हैं मनुष्य को ऐसे कर्म करने चाहिए जिससे मनुष्य इस सांसारिक कर्मों से मुक्त हो जाये। जो मनुष्य मांस कहते हैं उनसे भी परलोक में बदला लिया जाता है।

कामना के बस में रहना वाला व्यक्ति कभी भी किसी का भला नहीं  कर सकता है।इस कथा को सफल बनाने में प्रमुख रूप से सफल बनाने मे श्री ददन सिंह, संजय सिंह, प्रभात सुरोलिया, सतीश कुमार सिंह, सी पी सिंह, हीरा सिंह, भावेश मिश्रा, वीरेंदर सिंह, महेश सुलतानिया, मोहन अग्रवाल,पवन अग्रवाल,श्रीमती कृष्णा सुलतानिया, दिलीप साव, दीपक तिवारी, श्रवण कुमार, प्रदीप पांडे, धर्मेंदर पांडे, अशोक सिंह ,रणजीत पांडे अप्पू सिंह, राजेश झा, मुन्ना बरनवॉल, सुनील राय, सक्रिय रहे।

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