मनुष्य को हमेशा अपने गुरु और भगवान का बनकर रहना चाहिए...जिसे वेद अस्वीकार कर दें वो अधर्म है... श्री सुरेन्द्र हरिदास जी महाराज

VijaySharma
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पूज्य श्री सुरेन्द्र हरिदास जी महाराज के पावन सानिध्य में स्थान - MOCP तिसरा, झरिया धनबाद में 5 से 13 जनवरी 2024तक श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है।

श्रीमद् भागवत कथा के चतुर्थ दिवस की शुरुआत विश्व शांति के लिए प्रार्थना के साथ की गई। जिसके बाद पूज्य महाराज जी ने भक्तों को "हल फल तुम्हारी याद आती रहे माधव " भजन का श्रवण कराया।

संतों का कभी कुछ नहीं होता है संत कभी किसी को अपना नहीं कहते हैं और जो भी संतों के पास होता है उसे संत भगवान का कहते हैं। जब मनुष्य संतों का बन जाता है तभी मनुष्य भगवान का भी हो जाता है और भगवान फिर मनुष्य को स्वीकार कर लेते हैं। मनुष्य को हमेशा अपने गुरु के बताये हुए मार्ग पर चलकर और सच्ची निष्ठा के साथ भगवान का बनना चाहिए।

आज का मनुष्य  किसी का अनहित कर के अपना भला करना चाहता है लेकिन मनुष्य को हमेशा यह बात ध्यान रखनी चाहिए कि जब तक आप किसी का बुरा करोगे तो तुम्हारे साथ भी बुरा ही होगा। वो कैसा मित्र होता है जो मित्र के दुःख में दुखी ना हो। 

श्रीमद भागवत महापुराण में नरकों का वर्णन है जो मनुष्य जैसे कर्म करता उन्हें वैसे ही नरकों में डाल दिया जाता है।आज का मनुष्य इतना बड़ा हो गया है कि वह कहता है कि हम धर्म और भगवान में नहीं मानते हैं।आज मनुष्य अपने माँ-बाप की भी निंदा कर देते हैं और जिन्होंने कभी रामायण पढ़ी ही नहीं वह मनुष्य रामायण पर भी प्रश्न उठाते हैं। 

जो मनुष्य अपने माता-पिता, गुरु ,ब्राह्मण और वेद की निंदा करता या सुनता है उस मनुष्य को कालसूत्र नामक नर्क में डाल दिया जाता है और उन्हें आग में तपाया जाता है। माता, पिता और धर्म ये तीनो भगवान से कम नहीं है जिसे वेद अस्वीकार कर दे वो अधर्म है। 

जब भी घर में भोजन बने तो सब से पहले भोजन गाय को दें और फिर अपने अतिथि को खिलाना चाहिए और जो मनुष्य ऐसा नहीं करते हैं उन्हें कर्मिभोज नामक नर्क में जाना पड़ता है।  और जो मनुष्य अनैतिक कार्य करता है उसे भी  नर्क में जाना होता है।  अगर नर्क में जाने से बचना है तो मनुष्य को मरने से पहले अपने कर्मों का प्रायश्चित कर लेना चाहिए। मनुष्य के तरने का केवल एक ही कारण है भगवान का नाम लेना। मनुष्य को हमेशा भगवान का बन कर रहना चाहिए जिससे हमेशा मनुष्य का कल्याण होता रहे।

जो मनुष्य भगवान का आसरा लेता है उसे कभी भी नर्क में नहीं जाना पड़ता है।  मनुष्य को अपने बच्चों के नाम भगवान के नाम पर रखना चाहिए मनुष्य सत्संग में जाते हैं लेकिन उन बातों को कभी भी अपने जीवन में उतारते नहीं हैं।इस कथा को सफल बनाने में प्रमुख यजमान परिवार अमर निषाद रितु देवी,विजय निषाद कमला देवी,उषा पासवान,ठाकुर बाबा, महावीर राणा, जगरनाथ महतो,चिन्ता देवी,सुरज यादव,सुरजीत कु० सिदार, ममता कुमारी,जीवन कुमार, झरना महतो,सिपाही सिंह,,भोला साहनी, आलोक राज,सौरव पासवान,मथुरा मल्लाह, मुन्नी देवी,गुड़िया देवी, आदि समस्त नगरवासियों के सहयोग से किया जा रहा है।

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