कोल उद्योग के निजीकरण के विरुद्ध सी एम डब्लू यु का प्रेस वार्ता

VijaySharma
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निरसा  -- देश के महारत्न कंपनी को बर्बाद कर देश विदेशी कंपनी के ठेकेदारों  को सौपा जा रहा है ।देश विरोधी मोदी नेतृत्व की भाजपा सरकार ने एक के एक बाद बड़ा हमला किया है ,उसी के विरुद्ध व्यापक जन आंदोलन करने के लिए ईसीएल सीसीएल , बीसीसीएल झारखंड बंगाल के नेता एकत्रित हुए हैं। प्रेस वार्ता में आये नेताओ ने कहा कि भारत मे कोयला खनन की यात्रा 250 वर्षो से हो रहा है ,। 1947 में भारत मे 450 कोयला खदाने थी , जिसमें मजदूरों द्वारा शारिरिक परिश्रम से कोयला का उत्पादन होता रहा । मजदूरों के बीच एक ट्रेड यूनियन (एटक) का निर्माण हुआ जो मालिको द्वारा मजदूरों के असहनीय शोषण के विरुद्ध आवाज उठाने का काम करने लगी ।धीरे धीरे मजदूरों के शोषण के विरुद्ध ट्रेड यूनियनों द्वारा कोयला उद्योगों को राष्ट्रीयकरण करने की मांग उठने लगी । अंततः 1971 से 1973 के बीच 937 खानों को राष्ट्रीयकरन किया गया ।कोयला जगत को मोदी सरकार माइंस डेवलेपर ऑपरेटर के माध्यम से निजी हाथों में उत्पादन , परिवहन सबकुछ निजी हाथों में देने का पहल चालू हो चुका है । उसी बीच ईसीएल के 22 कोयला खदानों को चिन्हित किया गया है । और भी घटक तब हुआ जब 16 फरवरी को सभी छोड़ी गयी 22 खदानों के नाम मात्र रेवेन्यू विनियम के लिए निजी मालिको के हाथ दिए जाने का नोटिस जारी करना । यह सब नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन नीति के तहत हो रहा है । इस तरह देश के 160 कोयला खदानों को  देसी विदेशी पूंजीपतियों के हाथों देने का षड्यंत्र हो रहा है । इस तरह के कोयला भंडार के लूट के  षड्यंत्र को नही चलने दिया जाएगा  । इसे किसी भी कीमत पर रोकना होगा ।
रिपोर्ट राजू सिंह

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