108 कुंडीय श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ की परिक्रमा को उमड़ा जन सैलाब

VijaySharma
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श्री धाम वृन्दावन के परिक्रमा मार्ग  स्थित कुम्भ मेला क्षेत्र में चल रहे 108 कुंडिय श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ में यज्ञ के दर्शन एवं परिक्रमा हेतु आसपास के क्षेत्र से हजारों की संख्या में भक्त पहुंच रहे हैं।
यज्ञ से संबंधित जानकारी देते हुए प्रमुख यज्ञाचार्य आचार्य बालकृष्ण महाराज ने बताया कि यज्ञ एक विशिष्ट वैज्ञानिक और आध्यात्मिक प्रक्रिया है, जिसके द्वारा मनुष्य अपने जीवन को सफल बना सकता है। यज्ञ के जरिये आध्यात्मिक संपदा की भी प्राप्ति होती है। श्रीमद्भागवत् गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने यज्ञ करने वालों को परमगति की प्राप्ति की बात की है। यज्ञ एक अत्यंत ही प्राचीन पद्धति है, जिसे देश के सिद्ध-साधक संतों और ऋषि-मुनियों ने समय-समय पर लोक कल्याण के लिए करवाया। यज्ञ में मुख्यत: अग्निदेव की पूजा की जाती है। भगवान अग्नि प्रमुख देव हैं। हमारे द्वारा दी जाने वाली आहुति को अग्निदेव अन्य देवताओं के पास ले जाते हैं। फिर वे ही देव प्रसन्न होकर उन छवियों के बदले कई गुना सुख, समृद्धि और अन्न-धन देते हैं।यज्ञ मानव जीवन को सफल बनाने के लिए एक आधारशिला है। इसके कुछ भाग विशुद्ध आध्यात्मिक हैं। अग्नि पवित्र है और जहां यज्ञ होता है,वहां संपूर्ण वातावरण,पवित्र और देवमय बन जाता है।यज्ञवेदी में 'स्वाहा' कहकर देवताओं को भोजन परोसने से मनुष्य को दुख-दारिद्रय और कष्टों से छुटकारा मिलता है। वेदों में अग्नि परमेश्वर के रूप में वंदनीय है। अग्निदेव से प्रार्थना की गई है कि हे अग्निदेव! तुम हमें अच्छे मार्ग पर ले चलो, हमेशा हमारी रक्षा करो। यज्ञ को शास्त्रों में सर्वश्रेष्ठ कर्म कहा गया है। इसकी सुगंध समाज को सुसंगठित कर एक सुव्यवस्था देती है। ऐसा इसलिए, क्योंकि यज्ञ करने वाले अपने आप में दिव्यात्मा होते हैं। यज्ञों के माध्यम से अनेक ऋद्धियां-सिद्धियां प्राप्त की जा सकती हैं। यज्ञ मनोकामनाओं को सिद्ध करने वाला होता है। विशेष आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए, विशेष संकट निवारण के लिए और विशेष शक्तियां अर्जित करने के लिए विशिष्ट विधि-विधान भी भिन्न-भिन्न हैं।यज्ञ आचार्य ने बताया कि प्रत्येक हवन कुंड के लिए 200 किलो सामग्री लगती है। राजस्थान से 350 पीपा घी मगाया गया है। लगभग 8 महीने से गाय का शुद्ध घी इकट्ठा करने का कार्य चल रहा था। लगभग 50 किलो काले तिल, 50 किलो जौ एवं 50 किलो चावल एक हवन कुंड के लिए हवन सामग्री में लगाया जाता है। यज्ञ में भाग लेने वाले यजमानों के द्वारा पूर्ण विधि विधान का पालन किया जा रहा हैlकार्यक्रम  में मुख्य रूप से जगदीश काबरा, मंजू काबरा, अर्पित काबरा, अवनी काबरा, सुभाष काबरा, सतीश मित्तल,  बाबूलाल मोहता, महेश खंडेलवाल, दीनानाथ शर्मा, पवन मित्तल, संजय चंद्रा, हीरालाल दमानी, गुलाबचंद पारीक एवं रवि गोलयान आदि उपस्थित रहे।
स्टेट हेड आशुतोष शर्मा
वृंदावन

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